राजस्थान हाईकोर्ट का ताज़ा फैसला: “नीच” जैसे शब्द बोलने मात्र से SC/ST एक्ट लागू नहीं होता

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाया है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि केवल किसी व्यक्ति को “नीच” जैसे अपमानजनक शब्द कह देने भर से अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) अपने आप लागू नहीं होता। न्यायालय ने कहा है कि इस अधिनियम को लागू करने के लिए स्पष्ट तौर पर साबित होना चाहिए कि अपमान जाति-आधारित था और आरोपी को उस व्यक्ति की जाति की जानकारी थी।

⚖️ मामला क्या था?

यह विवाद 2011 में IIT जोधपुर से जुड़े एक मामले से जुड़ा है। उस समय सरकारी अधिकारी अतिक्रमण की जांच करने गए थे, जहाँ कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और कथित तौर पर अधिकारियों को “नीच” तथा “भिखारी” जैसे शब्द कहे थे। अधिकारियों ने इसे जातिगत अपमान मानते हुए एफआईआर दर्ज करवाई और इसके साथ SC/ST एक्ट की धाराएँ लगाईं।

📍 आरोपियों की दलील

आरोपियों ने हाईकोर्ट में दलील दी कि:

  • उन्हें अधिकारियों की जाति का जानकारी नहीं थी,
  • और उनके द्वारा बोले गए शब्द ऐसी कोई जाति-आधारित निंदा नहीं दर्शाते।
    कोर्ट ने भी पाया कि इन शब्दों का इस्तेमाल विशेष जाति को निशाना बनाने के लिए नहीं किया गया था।

🧑‍⚖️ कोर्ट का फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि SC/ST एक्ट तभी लागू किया जा सकता है जब कोर्ट यह तय कर सके कि:

  1. अपमान जाति-आधारित था,
  2. आरोपी को पीड़ित की जाति की जानकारी थी,
  3. अपमान सार्वजनिक रूप से हुआ (दूसरों की उपस्थिति में), और
  4. आरोपों के लिए ठोस सबूत मौजूद हों।
    इन आधारों पर अदालत ने SC/ST एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया।

👮 लेकिन मामला पूरी तरह समाप्त नहीं

हालाँकि SC/ST एक्ट के तहत आरोप हटाए गए, अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी कर्मचारियों के कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालने और धक्का-मुक्की जैसे IPC (भारतीय दंड संहिता) की धाराएँ अब भी लागू रहेंगी और इन पनाहों पर मामला आगे बढ़ेगा।

📌 इस फैसले का मतलब

यह निर्णय कोर्ट की सख़्ती को दर्शाता है कि विशेष कानूनों का इस्तेमाल केवल शब्दों के सामान्य प्रयोग पर नहीं हो सकता — खासकर जब तक जाति-आधारित अपमान और इरादे का स्पष्ट प्रमाण सामने न आए। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के फैसले से SC/ST एक्ट के गलत इस्तेमाल से बचाव करने में मदद मिल सकती है, जबकि असली जातिगत अत्याचार की घटनाओं पर कानून की रक्षा बनी रहेगी।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *