रायपुर, 9 फरवरी 2026 — छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (Chhattisgarh High Court) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण न्यायिक आदेश में कहा है कि किसी भी मुस्लिम व्यक्ति को अपनी संपत्ति का पूरा हिस्सा वसीयत (Will) के माध्यम से किसी एक व्यक्ति को बिना सभी कानूनी वारिसों की सहमति के नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस्लामी कानून (Muslim Personal Law) के मूल सिद्धांत के अनुसार, एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति का केवल एक-तिहाई (1/3) हिस्सा ही बिना वारिसों की अनुमति से वसीयत कर सकता है; यदि वह एक-तिहाई से अधिक हिस्सा देना चाहता है तो सभी वैध उत्तराधिकारियों (Legal Heirs) की सहमति जरूरी होगी।
⚖️ फैसला क्यों अहम?
इस फैसले से यह बात कानूनी रूप से साफ हो गई है कि
• कोई भी मुस्लिम संपत्ति का पूरा मालिक नहीं होता,
• उसने जो भी वसीयत लिखी है, वह तब तक मान्य नहीं होगी जब तक अन्य उत्तराधिकारियों का समर्थन न मिला हो,
• मौजूदा इस्लामी उत्तराधिकार के सिद्धांत (जो कोर्ट ने लागू किए) के साथ न्यायपालिका ने भी संतुलन बनाया है।
उच्च न्यायालय के अनुसार, यह सिद्धांत इस्लामी कानून के मूल दर्शन पर आधारित है, जिसका उद्देश्य उत्तराधिकारियों के अधिकारों की रक्षा करना है और किसी भी एक व्यक्ति को अनुचित लाभ नहीं देना।
📌 फैसले का असर
यह निर्णय मुसलमानों के संपत्ति विवादों, वसीयत से जुड़े मामलों और उत्तराधिकार कानूनों में व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
विशेष रूप से तब जब वसीयत में बड़ी सूचनाएँ होती हैं जैसे कि जमीन, व्यवसाय, या अन्य मूल्यवान संपत्तियों का बंटवारा।

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