प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच विवाद तेज हो गया है। मेला अथॉरिटी ने स्वामी को दो नोटिस जारी किए हैं, जिसमें शंकराचार्य होने का सबूत मांगा गया है और बिना अनुमति बैरियर तोड़ने का आरोप लगाया गया है।
पहला नोटिस: 18 जनवरी का विवाद
18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद pontoon पुल 2 पर बैरियर तोड़कर संगम अपर मार्ग पर भीड़ के साथ स्नान के लिए गए थे, जिससे भगदड़ का खतरा पैदा हो गया। नोटिस में 24 घंटे में जवाब न देने पर मेला में दी गई भूमि, सुविधाएं रद्द करने और प्रवेश प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी गई। यह नोटिस उनकी दो संस्थाओं—श्री शंकराचार्य आश्रम शाकंभरी पीठ सहारनपुर और बद्रिका आश्रम हिमालय सेवा शिविर—के नाम भेजा गया।
दूसरा नोटिस: शंकराचार्य का दावा
दूसरा नोटिस शंकराचार्य होने के सबूत मांगने वाला था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के ज्योतिष पीठ शंकराचार्य नियुक्ति पर रोक के आदेश का हवाला दिया गया। स्वामी ने 19 जनवरी वाले नोटिस का जवाब दिया, लेकिन 18 जनवरी वाले की जानकारी पहले नहीं थी।
स्वामी का पक्ष
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उन्हें पहले नोटिस की जानकारी नहीं थी, लेकिन अब इसका भी जवाब देंगे। उन्होंने प्रशासन पर बौखलाहट का आरोप लगाया और मौनी अमावस्या घटना से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। स्वामी ने मेला अथॉरिटी को पलटवार में कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें 24 घंटे में नोटिस वापस लेने या कोर्ट जाने की धमकी दी
विवाद का पृष्ठभूमि
माघ मेला में स्वामी को स्नान से रोके जाने और जितेंद्रानंद सरस्वती से बहस के बाद विवाद भड़का। रामभद्राचार्य और पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद जैसे संतों ने भी बयान दिए हैं। मेला प्रशासन ने शंकराचार्य दावे पर सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर नोटिस जारी किया।

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