सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ममता सरकार को चुनाव से पहले झटका

नई दिल्ली, 9 फरवरी 2026 — सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ सुनवाई के बाद एक अहम फैसला सुनाया है, जो राज्य की राजनीति में, खासकर आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा उतार-चढ़ाव ला सकता है।

मुख्य बात यह है कि उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा कानूनी झटका दिया है और राज्य के कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों को पुराना महंगाई भत्ता (DA) 2008 से 2019 तक का पूरा भुगतान कराने का आदेश दिया है।

इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि ममता सरकार के वकीलों द्वारा दाखिल दलीलों पर कोर्ट ने कड़ी दृष्टि रखी और राज्य प्रशासन को अपने वित्तीय दायित्वों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने पाया कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को DA का पूरा भुगतान करना कानूनी और संवैधानिक अधिकार है।

📌 प्रमुख घटनाक्रम

🔹 पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची संशोधन (Special Intensive Revision/SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दलीलें चलीं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप लगाए, लेकिन कोर्ट ने सुनवाई जारी रखी।
🔹 दलीलें सुनते हुए कोर्ट ने मुख्य मुद्दों पर चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन से जवाब भी मांगा, जिससे चुनाव प्रक्रिया के आसपास बढ़ते तनाव का असर दिल्ली में भी दिखा।
🔹 यह सुनवाई प्रमुख राजनीतिक और संवैधानिक सवाल उठाती है, जैसे चुनाव से पहले मतदाता सूची में संशोधन, चुनाव आयोग-सरकार संबंध, और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के अधिकारों का संरक्षण।
🔹 ममता बनर्जी अपनी दलील खुद सुप्रीम कोर्ट में पेश करने वाली पहली sitting CM बनकर भी सुर्खियों में रही।

⚖️ फैसले का मतलब क्या है?

विश्लेषकों के अनुसार यह आदेश न सिर्फ वित्तीय दायित्वों का पालन सुनिश्चित करेगा बल्कि राजनीतिक रूप से भी टीएमसी शासन की छवि पर सवाल उठाता है क्योंकि चुनावी माहौल पहले ही गरमाया हुआ है
मुख्य न्यायालय की टिप्पणियाँ यह संकेत देती हैं कि न्यायपालिका संवैधानिक अधिकारों और दायित्वों पर कड़ी निगरानी रख रही है, जिससे ममता सरकार के लिए अगले कुछ सप्ताह चुनौतिपूर्ण हो सकते हैं।

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